₹125 का पेट्रोल… सच या दावा?…….अगर पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता… तो क्या आज ₹125 लीटर खरीदना पड़ता? सरकार का बड़ा दावा!
नई दिल्ली, 06 अगस्त 2026। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol – EBP) को लेकर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं के बीच सरकार की नीति का बचाव किया है। मंत्रालय का कहना है कि यदि देश में एथेनॉल मिश्रण की व्यवस्था लागू नहीं की गई होती, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।
मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद उपभोक्ताओं को दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराया गया। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि प्रत्येक लीटर पेट्रोल में 20 प्रतिशत घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल शामिल था, जिसकी कीमत पहले से निर्धारित रहती है और वह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य केवल ईंधन को किफायती बनाना नहीं है, बल्कि देश को वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता से सुरक्षित रखना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना तथा ईंधन पर होने वाले विदेशी मुद्रा व्यय को कम करना भी है। मंत्रालय के अनुसार, इससे देश के किसानों, चीनी मिलों और घरेलू अर्थव्यवस्था को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा 316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात को प्रतिस्थापित किया गया है तथा 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण किसी प्रकार की करदाता सब्सिडी पर आधारित योजना नहीं है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाली रणनीतिक पहल है, जिसने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान उपभोक्ताओं को महंगे पेट्रोल से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

