CG BREAKING: धर्म स्वतंत्रता अधिनियम में कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला…..महिला को उम्रकैद की सजा

डिजिटल डेस्क | दुर्ग/रायपुर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अधिनियम, Pankaj Kumar Sinha की अदालत ने ‘चमत्कारी इलाज’ प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी ईश्वरी साहू (41) को दोषी करार दिया है। यह मामला प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत सजा का पहला उदाहरण माना जा रहा है।

विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 30/2025 के अनुसार, गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र के ग्राम सुरसाबांधा निवासी आरोपी ने बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के 18 वर्षीय युवती योगिता सोनवानी का इलाज करने का दावा किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जनवरी से मई 2025 के बीच आरोपी ने अपने घर में तथाकथित उपचार के नाम पर चमत्कारी तेल, गर्म पानी और धार्मिक प्रार्थनाओं का सहारा लिया। इस दौरान पीड़िता की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और 22 मई 2025 को उसकी मृत्यु हो गई।

घटना के बाद मृतका की मां सुनीता सोनवानी ने 23 मई 2025 को राजिम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पूरी करते हुए 21 जुलाई 2025 को न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें मृतका की मां और चिकित्सकीय विशेषज्ञ शामिल रहे।

न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत 1 वर्ष और टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम के तहत 1-1 वर्ष के कारावास एवं अर्थदंड से भी दंडित किया गया।

अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने झाड़-फूंक और अंधविश्वास के माध्यम से इलाज का दावा करते हुए पीड़िता को गुमराह किया तथा धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन देने का प्रयास किया। न्यायालय ने पीड़िता के परिजनों को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं।

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