दुर्ग के सामने अब बड़ा सवाल यही है—कमिश्नर की नियुक्ति कब होगी ….एक महीने से कमिश्नर विहीन दुर्ग नगर निगम;सरकार तुरंत करे नियुक्ति — अरुण वोरा
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में पिछले लगभग एक महीने से आयुक्त (कमिश्नर) का पद रिक्त होना राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता और दुर्ग शहर के प्रति उसकी गंभीर उदासीनता को उजागर करता है। जिस नगर निगम पर लाखों नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और शहर के विकास की जिम्मेदारी है, वहां इतने लंबे समय तक पूर्णकालिक कमिश्नर की नियुक्ति नहीं होना सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
दुर्ग शहर के पूर्व विधायक,वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने कहा कि आज दुर्ग की जनता सफाई, पेयजल, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट सहित बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है। दूसरी ओर, नगर निगम में पूर्णकालिक कमिश्नर नहीं होने से प्रशासनिक फैसले लंबित हैं और विकास कार्यों की रफ्तार थम गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार बताए कि एक महीने से दुर्ग नगर निगम को पूर्णकालिक कमिश्नर क्यों नहीं मिल पाया? क्या दुर्ग की जनता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है?
अरुण वोरा ने कहा कि भाजपा सरकार के पास घोषणाएं करने का समय है, लेकिन शहरों की व्यवस्था संभालने का समय नहीं है। यदि सरकार अधिकारियों की नियुक्ति तक समय पर नहीं कर पा रही है, तो सुशासन के उसके सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक पद को इतने लंबे समय तक रिक्त रखना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर दुर्ग नगर निगम में पूर्णकालिक कमिश्नर की नियुक्ति करने की मांग करते हुए कहा कि दुर्ग की जनता को सरकार की प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता की कीमत चुकाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। शहर का विकास और नागरिक सुविधाएं किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन वर्तमान सरकार इस जिम्मेदारी से लगातार मुंह मोड़ रही है।
अरुण वोरा ने कहा कि दुर्ग जैसे प्रदेश के प्रमुख शहर की नगर निगम को भगवान भरोसे छोड़ देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि सरकार की यही कार्यप्रणाली रही तो विकास कार्य और अधिक प्रभावित होंगे तथा जनता की परेशानियां बढ़ती जाएंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि बिना किसी और देरी के पूर्णकालिक कमिश्नर की नियुक्ति कर दुर्ग की जनता को राहत दी जाए.

