दुर्ग में अफीम कांड का नया ट्विस्ट: जिस सरपंच ने खोली थी अफीम खेती की पोल, अब उसी की कुर्सी गई!
डिजिटल डेस्क | दुर्ग: छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती का पहला मामला दुर्ग जिले में सामने आया था। इस मामले की शिकायत समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम द्वारा की गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को अफीम की खेती करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
इसी बीच अब समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम को उनके पद से हटा दिया गया है। एसडीएम (राजस्व) कोर्ट ने उन्हें चुनावी हलफनामे में आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाने का दोषी पाया है। कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए उनका निर्वाचन निरस्त कर सरपंच पद रिक्त घोषित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, अरुण गौतम ने वर्ष 2025 के पंचायत चुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज हत्या के प्रयास (धारा 307) सहित अन्य मामलों की जानकारी नहीं दी थी। इस पर चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने आपत्ति दर्ज कराते हुए याचिका दायर की थी।
शुरुआत में रिटर्निंग ऑफिसर ने उनकी आपत्ति खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रकरण की सुनवाई दोबारा एसडीएम कोर्ट में की गई। सुनवाई के दौरान दस्तावेजों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अरुण गौतम के खिलाफ दुर्ग न्यायालय में गंभीर आपराधिक मामला लंबित था, जिसकी जानकारी उन्होंने हलफनामे में छिपाई थी।
एसडीएम कोर्ट ने इसे निर्वाचन नियमों का उल्लंघन मानते हुए अरुण गौतम का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। साथ ही समोदा गांव का सरपंच पद रिक्त घोषित करते हुए दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
गौरतलब है कि करीब दो महीने पहले अरुण गौतम ने होली के बाद भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती होने की शिकायत की थी। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। वहीं विनायक ताम्रकार ने भी अरुण गौतम के खिलाफ चुनावी हलफनामे में आपराधिक जानकारी छिपाने की शिकायत दर्ज कराई थी।
याचिकाकर्ता भुवनेश्वरी देशमुख ने कोर्ट से स्वयं को सरपंच घोषित करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुवनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे। ऐसे में दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को सीधे विजयी घोषित करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर गांव में दोबारा चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है।

