पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने पर सरकार का मेगा प्लान! 3 साल में ₹1.72 लाख करोड़ खर्च, किसानों को होगा बड़ा फायदा

रायपुर/नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol Programme) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस योजना का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

संसद में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने पिछले तीन एथेनॉल सप्लाई वर्षों (ESY) के दौरान एथेनॉल की खरीद पर लगभग ₹1.72 लाख करोड़ खर्च किए हैं। इससे देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लगातार मजबूती मिल रही है।

राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि ESY 2023-24 में तेल कंपनियों ने ₹48,757 करोड़, ESY 2024-25 में ₹73,996 करोड़ तथा ESY 2025-26 में जून 2026 तक ₹49,577 करोड़ मूल्य का एथेनॉल खरीदा।

सरकार के मुताबिक, तेल कंपनियां एथेनॉल की खरीद पूरी तरह घरेलू स्रोतों से करती हैं। इसमें गन्ने से बनने वाला सी-हेवी मोलासेस, बी-हेवी मोलासेस, गन्ने का रस, शुगर सिरप के अलावा खराब खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (FCI) का अतिरिक्त चावल और मक्का से तैयार अनाज आधारित एथेनॉल शामिल है। इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध हो रहा है और चीनी उद्योग को भी लाभ मिल रहा है।

16 जुलाई 2026 तक देशभर में 501 एथेनॉल निर्माण इकाइयां सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के साथ पंजीकृत हो चुकी हैं, जो पेट्रोल में मिश्रण के लिए डिनैचर्ड एनहाइड्रस एथेनॉल की आपूर्ति कर रही हैं।

तेल कंपनियां स्वयं भी एथेनॉल उत्पादन कर रही हैं। IOC की उत्पादन क्षमता 228 किलोलीटर प्रतिदिन, BPCL की 200 किलोलीटर प्रतिदिन और HPCL Biofuels की 120 किलोलीटर प्रतिदिन है। जून 2026 तक HPCL Biofuels ने 9,373 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन किया, जो तीनों कंपनियों में सबसे अधिक रहा।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात का स्थान है।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति नेटवर्क के विस्तार से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च कम होगा, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसलिए एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को सरकार की प्रमुख ऊर्जा रणनीतियों में शामिल कर तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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