दुर्ग भाजपा में गुटबाजी चरम पर: संगठन की सूची से महापौर का नाम गायब, चुनावी भविष्य पर मंडराया खतरा…..
डिजिटल डेस्क |दुर्ग | दुर्ग जिले में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी हालात किसी से छिपे नहीं हैं। पार्टी के भीतर लगातार बढ़ती गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। विकास कार्यों को लेकर मतभेद तो पहले से ही थे, लेकिन अब संगठनात्मक नियुक्तियों में भी खींचतान साफ दिखाई दे रही है।
हाल ही में दुर्ग जिला भारतीय जनता युवा मोर्चा की नई कार्यकारिणी की घोषणा ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब दुर्ग नगर निगम की महापौर अल्का बाघमार का नाम स्थायी आमंत्रित सदस्य की सूची से गायब पाया गया। इस फैसले ने यह संदेह पैदा कर दिया है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।

सूत्रों की मानें तो पार्टी के अंदर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं, जिनके बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज होते दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि संगठनात्मक फैसलों में भी राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर दुर्ग भाजपा की कमान किसके हाथ में है?
क्या पूरा भाजपा कार्यालय किसी मंत्री के बंगले से संचालित हो रहा है?
क्या महापौर, मंत्री और जिला अध्यक्ष के बीच मनमुटाव गहराता जा रहा है?
या फिर संगठन के भीतर कोई और शक्ति केंद्र उभरकर सामने आ रहा है?
ये सवाल अब आम कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बन चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इसी तरह गुटबाजी जारी रही, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। दुर्ग शहर की जनता जहां विकास की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं अंदरूनी राजनीति के कारण विकास कार्य प्रभावित होते नजर आ रहे हैं।
अगर समय रहते इस गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले चुनाव में भाजपा को दुर्ग जिले में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, पार्टी के भीतर चल रही यह अंदरूनी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।

