दुर्ग में सांडों की लड़ाई के चपेट में आए 2 छात्रा, आखिर कब जागेगा नगर निगम?…..गोधाम योजना का लाभ कहां? सड़कों पर घूमते आवारा पशु, हादसों का खतरा बरकरार
डिजिटल डेस्क | दुर्ग। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कुछ दिन पहले सांड के हमले में एक युवक के घायल होने की घटना सामने आई थी। अब दुर्ग में भी आवारा सांडों की लड़ाई के कारण हादसे की खबर सामने आई है। दुर्ग के फरिश्ता कॉम्प्लेक्स के पास दो सांड आपस में भिड़ गए। इसी दौरान रविशंकर स्टेडियम में रनिंग की प्रैक्टिस कर घर लौट रहे पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे दो छात्रा हिमानी यादव (21) और दीपिका देवांगन (20)सांडों की लड़ाई की चपेट में आ गए। घटना में दोनों छात्रों के सिर पर चोट लगने की जानकारी सामने आई है। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
इस घटना ने एक बार फिर शहर में आवारा पशुओं की समस्या और नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा सांडों की जिम्मेदारी किसकी है?
गोधाम योजना के बावजूद सड़कों पर आवारा पशु क्यों?
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने गौवंश के संरक्षण और देखभाल के लिए गोधाम योजना की पहल की है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब गौवंश के संरक्षण के लिए योजना बनाई गई है, तो उसका लाभ जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है? शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते आवारा पशुओं के कारण आम नागरिकों को लगातार खतरा बना रहता है।
सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण वाहन चालकों को दुर्घटना का डर रहता है। वहीं, सांडों की आपसी लड़ाई के बीच आने वाले राहगीर भी घायल हो सकते हैं। ऐसे में केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।
महापौर और नगर निगम से तीखे सवाल
दुर्ग नगर निगम के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सवाल है कि क्या उन्हें शहर की इस समस्या की जानकारी नहीं है? क्या आवारा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनकी नियमित निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?
जब सरकार ने गौवंश के संरक्षण के लिए योजना बनाई है, तो फिर शहर की सड़कों पर आवारा पशु खुलेआम क्यों घूम रहे हैं?
क्या नगर निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी तब जागेंगे, जब किसी राहगीर, बच्चे या बुजुर्ग के साथ कोई गंभीर घटना हो जाएगी?
यह किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा का सवाल है। गोधाम योजना का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब गौवंश की उचित देखभाल के साथ सड़कों पर घूम रहे पशुओं के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दुर्ग नगर निगम को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवारा पशुओं की पहचान, सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्था और नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि शहर के लोगों को हर दिन सड़क पर निकलते समय किसी अनहोनी का डर न सताए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—गोधाम योजना है, जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं, नगर निगम भी है, फिर दुर्ग की सड़कों पर आवारा सांडों का आतंक कब खत्म होगा?

