सियासी चुभन: क्या आज की राजनीति Instagram Reel वाली हो गई है? जनता के बीच कम, कैमरे के सामने ज्यादा नजर आ रहे जनप्रतिनिधि
क्या आज की राजनीति Instagram Reel वाली हो गई है? जनता के बीच कम, कैमरे के सामने ज्यादा नजर आ रहे जनप्रतिनिधि
डिजिटल डेस्क (रवि प्रकाश) । कभी राजनीति का मतलब जनता के बीच बैठना, उनकी समस्याएं सुनना, गलियों में घूमना और सड़क पर उतरकर लोगों की आवाज बनना हुआ करता था। लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि क्या राजनीति भी Instagram Reel के दौर में पहुंच गई है?

आज कई नेता और जनप्रतिनिधि जनता के बीच कम और कैमरे के सामने ज्यादा दिखाई देते हैं। सड़क पर कोई कार्यक्रम हो, पौधरोपण हो, निरीक्षण हो, उद्घाटन हो या फिर किसी समस्या पर मौके का दौरा—हर गतिविधि के साथ कैमरा और सोशल मीडिया पोस्ट लगभग अनिवार्य नजर आने लगे हैं।
जनता पूछ रही है—Reel बनी या समस्या सुलझी?
सोशल मीडिया आज जनसंपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल तब खड़ा होता है, जब Reel में विकास तेज नजर आए और जमीन पर वही विकास गायब दिखाई दे।
सड़क पर गड्ढे हैं, नालियां जाम हैं, बाजारों में अव्यवस्था है, यातायात की समस्या है, स्ट्रीट लाइट और सफाई को लेकर शिकायतें हैं—लेकिन इन समस्याओं के बीच भी कैमरे के सामने मुस्कुराता हुआ राजनीतिक चेहरा आसानी से मिल जाता है।
जनता का सवाल सीधा है—मोबाइल कैमरे के लिए किया गया दौरा ज्यादा जरूरी है या समस्या का स्थायी समाधान?
राजनीति सेवा की या सोशल मीडिया की?
पहले नेता जनता के घर तक पहुंचते थे, अब कई बार जनता को ही नेता की सोशल मीडिया पोस्ट देखकर पता चलता है कि उनका जनप्रतिनिधि उनके इलाके में आया था।
फोटो खिंचवाना और Reel बनाना गलत नहीं है। समस्या तब है जब Reel ही काम का प्रमाणपत्र बन जाए।
जनता को यह तय करना होगा कि उसे कैमरे के सामने दिखने वाला नेता चाहिए या जमीन पर काम करने वाला जनप्रतिनिधि।
हर दौरे का कैमरा जरूरी क्यों?
किसी सड़क का निरीक्षण हुआ—Reel।
किसी नाली की सफाई हुई—Reel।
किसी कार्यक्रम में पहुंचे—Reel।
किसी अधिकारी को निर्देश दिया—Reel।
जनता से मिले—Reel।
सवाल यह है कि अगर हर काम का उद्देश्य सोशल मीडिया पर दिखना है, तो काम जनता के लिए हो रहा है या कैमरे के लिए?
अब जनता को Reel नहीं, Result चाहिए
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन लाइक, व्यू और कमेंट से नहीं, बल्कि उसके काम से होना चाहिए। जनता को चमकदार वीडियो नहीं, अच्छी सड़क चाहिए। भाषण नहीं, बेहतर यातायात व्यवस्था चाहिए। फोटो नहीं, साफ बाजार और व्यवस्थित शहर चाहिए।
राजनीति कैमरे के सामने 30 सेकंड की Reel नहीं है। राजनीति पांच साल की जवाबदेही है।
अब सवाल नेताओं से नहीं, जनता से भी है—क्या हम Reel देखकर नेता चुनेंगे या उसके जमीन पर किए काम देखकर?
क्योंकि Instagram पर दिखाई देने वाला विकास और जमीन पर दिखाई देने वाला विकास—दोनों में फर्क जनता से बेहतर कोई नहीं समझ सकता।

