CG BREAKING: हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुल्क नहीं रहे, रायपुर एम्स में चल रहा था इलाज
छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का आज मंगलवार को रायपुर एम्स में निधन हो गया। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। सांस लेने में दिक्कत के कारण उन्हें वेंटिलेटर में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था।
उनके मुख्य उपन्यासों में ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ , ‘नौकर की कमीज’ और ‘खिलेगा तो देखेंगे’ शामिल हैं। फिल्मकार मणिकौल ने साल 1979 में ‘नौकर की कमीज’ नाम से आये उनके उपन्यास पर बॉलीवुड फिल्म भी बनाई है। शुक्ल के दूसरे उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी ‘ को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल है। वे हिंदी साहित्य में अपने प्रयोगधर्मी लेखन के लिए प्रख्यात रहे हैं। उनकी लेखनी सरल सहज और अद्वितीय शैली के लिए जानी जाती है।
शुक्ल का जन्म 1 जनवरी सन 1937 को राजनांदगांव जिले में हुआ था। शुक्ल ने प्राध्यापन को रोजगार के रूप में चुना। वे जीवनभर साहित्य सृजन में ही लगे रहे। उन्हें हिंदी साहित्य में सादगी भरे लेखन और अनूठी कविताओं के लिये जाना जाता है। शुक्ल हिंदी साहित्य के 12वें साहित्यकार हैं। हिंदी साहित्य जगत में उनके अद्वितीय योगदान, विशिष्ट लेखन शैली और सृजनात्मकता के लिये साल 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे छत्तीसगढ़ के पहले लेखक हैं, जिन्हें इस सम्मान से पुरस्कृत किया गया है।

