छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा पर बड़ा फैसला! नक्सलवाद खत्म होते ही अब घटेगी सुरक्षा, 400 नेताओं पर सरकार की नजर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्त होने की घोषणा के बाद अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में कटौती की तैयारी की जा रही है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि सुरक्षा घटाने का फैसला लिया जा चुका है। अब अंतिम आदेश जारी होना बाकी है। सरकार एक साथ पूरी सुरक्षा हटाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा का स्तर कम करेगी।
गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके बाद नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए छह महीने तक निगरानी की गई। अब सुरक्षा श्रेणियों में एक स्तर की कटौती की गई है। Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त लोगों को Z, Z श्रेणी वालों को Y+ और Y+ श्रेणी वालों को Y श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। अगले छह महीने में फिर से एक स्तर की कटौती की जाएगी।
प्रदेश में करीब 400 नेताओं की सुरक्षा के लिए 1,550 से अधिक पुलिसकर्मी और 500 से ज्यादा वाहन तैनात हैं। इनकी व्यवस्था पर हर साल लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, बस्तर संभाग में 250 से अधिक नेताओं की सुरक्षा में 1,000 से ज्यादा जवान तैनात हैं। इस पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नेताओं की सुरक्षा घटाने के फैसले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कम करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यदि सुरक्षा घटाए जाने के बाद किसी जनप्रतिनिधि के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी।
सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में कटौती धीरे-धीरे की जाएगी। अब अंतिम आदेश जारी होने के बाद इस फैसले को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

