छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर…..बच्चे भविष्य बनाने निकले थे, सरकार ने उन्हें व्यवस्था सुधारने में लगा दिया!….
डिजिटल डेस्क | रवि प्रकाश: छत्तीसगढ़ की सरकारी शिक्षा व्यवस्था शायद अब वेंटिलेटर पर है…ऑक्सीजन देने का काम भी बच्चों ने अपने हाथ में ले लिया है।
कहीं शिक्षक नहीं, कहीं किताब नहीं, कहीं सुविधा नहीं… और कहीं शिक्षक ही नशे में स्कूल पहुंच रहे हैं।
कमाल की व्यवस्था है साहब!
जिन बच्चों के हाथ में किताब होनी चाहिए, उनके हाथ में धरने की तख्तियां हैं। जिन्हें भविष्य बनाना चाहिए, वे अपना वर्तमान बचाने के लिए सरकार से लड़ रहे हैं।
शिक्षक भर्ती के लिए अभ्यर्थी सड़क पर हैं और स्कूलों में बच्चे शिक्षक का इंतजार कर रहे हैं। फिर भी व्यवस्था चल रही है… शायद फाइलों में बहुत तेज दौड़ रही है। सरकार से बस इतनी गुजारिश है|
बच्चों को पढ़ने दीजिए, उन्हें शिक्षा व्यवस्था बचाने की ट्रेनिंग मत दीजिए। क्योंकि अगर बच्चे ही सरकार को शिक्षा का मतलब समझाने लगें,
तो फिर शर्म बच्चों को नहीं… व्यवस्था को आनी चाहिए।
थोड़ा बच्चों पर रहम कीजिए साहब…उन्हें शिक्षा व्यवस्था बचाने का काम मत दीजिए, उन्हें बस अपना भविष्य बनाने दीजिए।
क्योंकि जिस दिन बच्चे पढ़ाई छोड़कर व्यवस्था सुधारने निकल पड़े, समझ लीजिए— स्कूल की घंटी तो बज रही है,
लेकिन शिक्षा व्यवस्था की हालत में खतरे की घंटी बज चुकी है।

