DURG BREAKING: डॉ. राममनोहर लोहिया के सिद्धांतों को समर्पित ऐतिहासिक मेले में शामिल हुए अरुण वोरा

 

लोहिया से पिताजी के गहरे संबंधों को किया याद, कहा – “ये आंदोलन विचारों की अगली पीढ़ी को दिशा दे रहा है”

 

दुर्ग, 24 मई/

छत्तीसगढ़ के दुगाली (उमरा देहान) में आज डॉ. राममनोहर लोहिया की स्मृति में उनके अनुयायियों द्वारा एक अभूतपूर्व मेला आयोजित किया गया। यह आयोजन उस ऐतिहासिक भूमि पर हुआ, जहाँ 70 वर्ष पूर्व डॉ. लोहिया ने आदिवासियों को उनके जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों के लिए पहला बड़ा शांतिपूर्ण गांधीवादी आंदोलन शुरू किया था। इस स्थल पर वर्षों से चले आ रहे इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं रहा है, और आज इसकी चौथी पीढ़ी भी सक्रिय रूप से भाग ले रही है।

 

इस ऐतिहासिक अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री अरुण वोरा और श्रद्धेय श्री गोविंदलाल वोरा जी के सुपुत्र राजीव वोरा ने विशेष रूप से उपस्थित होकर जनभावनाओं से जुड़ाव दिखाया। उन्हें इस आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था वरिष्ठ गांधीवादी समाजवादी चिंतक व लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर जी ने।

 

वोरा ने डॉ. लोहिया और अपने पूज्य पिताजी श्रद्धेय श्री मोतीलाल वोरा जी के बीच के रिश्तों को याद करते हुए कहा,

“मेरे पूज्य पिताजी और डॉ. राममनोहर लोहिया जी के बीच घनिष्ठ संबंध थे। पिताजी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भी सोशलिस्ट पार्टी से की थी, लेकिन बाद में कांग्रेस के आदर्शों से प्रभावित होकर उन्होंने पूरी निष्ठा से जीवनभर कांग्रेस के लिए कार्य किया।”

अरुण वोरा ने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय की चौथी पीढ़ी का इस आंदोलन से जुड़ना यह प्रमाणित करता है कि डॉ. लोहिया के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थे।

 

इस आयोजन में हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया, और डॉ. लोहिया की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया।

“यह सिर्फ एक स्मृति नहीं, बल्कि प्रेरणा है — जो आने वाली पीढ़ियों को न्याय, समानता और शांति के रास्ते पर ले जाने वाली है।” – वोरा

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