भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी निजी ज़मीन! दुर्ग नगर निगम के खिलाफ पीएम से न्याय की गुहार

दुर्ग:नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा वर्ष 1988 में जल प्रदाय परियोजना हेतु की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल उठाए गए हैं। ब्राम्हणपारा दुर्ग निवासी नारायण शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखते हुए गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

नारायण शर्मा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि उनके दादा, स्व. बालाराम शर्मा के नाम पर दर्ज कृषि भूमि (खसरा नंबर 375/1 एवं 378, कुल रकबा 0.694 हेक्टेयर) को नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा जल प्रदाय परियोजना की प्रावधानित भूमि के साथ जोड़कर कूटरचित तरीके से अधिग्रहित किया गया, जबकि उस भूमि का परियोजना से कोई लेना-देना नहीं था।

उन्होंने बताया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दिनांक 15 अप्रैल 1988 को भेजे गए पत्र क्र. 575 में जिन भूमि खसरा नंबरों का उल्लेख किया गया है, उनमें उनके दादा की भूमि शामिल नहीं है। उक्त पत्र में खसरा नंबर 381, 382, 383/1 और 383/3 को परियोजना हेतु आवश्यक बताया गया है, जिन पर ही निर्माण कार्य (इंटक वेल, विद्युत उपकेन्द्र आदि) हुआ है।

नारायण शर्मा का आरोप है कि न.पा.नि. दुर्ग द्वारा बाद में दिनांक 23 जुलाई 1988 को भेजे गए पत्र में कूट रचना करते हुए उनके दादा की भूमि को भी परियोजना की प्रावधानित भूमि बताकर अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल किया गया, जबकि उस पर कोई निर्माण नहीं हुआ, न ही किसी प्रकार का हस्तांतरण हुआ।

उन्होंने मांग की है कि वर्ष 1988 की उक्त अधिग्रहण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो। साथ ही उनके दादा की भूमि को नगर पालिक निगम दुर्ग से मुक्त कराकर पुनः परिवार को लौटाया जाए।

यह प्रकरण न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार आम नागरिकों की संपत्ति, बिना वैध प्रक्रिया के, सरकारी उपयोग में ले ली जाती है।

संलग्न दस्तावेजों में नगर निगम दुर्ग द्वारा भेजे गए दोनों पत्र शामिल हैं, जो इस कथित गड़बड़ी की पुष्टि करते हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और न्याय की गुहार लगाई है।

अब देखना यह है कि इस प्रकरण में शासन-प्रशासन और नगर निगम दुर्ग क्या कदम उठाता है !और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है।

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