गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जानिए क्यों कहा जाता है आयरन लेडी
डिजिटल डेस्क/ भारत के लिए 77वां गणतंत्र दिवस बेहद खास साबित होने वाला है। दरअसल, इस मौके पर भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुफ्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगने की संभावना है। इसके लिए यूरोपीय आयोग (यूरोपियन कमीशन) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद (यूरोपियन काउंसिल) के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि के तौर पर भारत भी पहुंच चुके हैं। उनके साथ यूरोप के दर्जनभर अधिकारी भी भारत आए हैं। माना जा रहा है कि परेड के ठीक बाद भारत और यूरोप के अफसर भारत-ईयू के बीच एफटीए पर हस्ताक्षर कर दोनों पक्षों के रिश्तों को नई दिशाएं देंगे।

उर्सुला वॉन डेर लेयन मौजूदा समय में यूरोपीय संघ (ईयू) के मामलों को संभालने वाले केंद्रीय आयोग- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं। इसलिए उन्हें कई बार यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष भी कहा जाता है। इस पद के लिए हर पांच साल में यूरोप में चुनाव होते हैं और यूरोपीय देशों (फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, हंगरी समेत 27 देश) के अलग-अलग राजनीतिक दल इस चुनाव में उम्मीदवारी पेश करते हैं और चुनाव में हिस्सा लेते हैं।
उर्सुला वॉन डेर लेयन 2019 में पहली बार ईयू के चुनाव में खड़ी हुई थीं और इसमें जीती भीं। उन्हें जर्मनी के सत्तासीन दल- क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) की तरफ से नामित किया गया था, जो कि जर्मनी का प्रमुख दल है। जर्मनी की तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल भी इसी पार्टी से थीं और उनकी सरकार में वॉन डेर लेयन रक्षा मंत्री रही थीं।
उर्सुला ने 2024 में हुए ईयू के चुनाव में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष के तौर पर वे दुनिया के सामने 27 देशों के संगठन का नेतृत्व करती हैं और यूरोप की बहुमत वाली एक सम्मिलित आवाज के तौर पर काम करती हैं।
शुरुआती वर्षों में वह ब्रसेल्स में पली-बढ़ीं और बचपन से ही जर्मन और फ्रेंच (यूरोप की दो प्रमुख भाषाएं) दोनों भाषाएं धाराप्रवाह बोलती थीं। हालांकि, जब वह 13 वर्ष की थीं, तब उनका परिवार जर्मनी लौट गया। उनका परिवार हैनोवर के पास एक बड़े फार्म हाउस में रहता था, जहां उर्सुला को घुड़सवारी का शौक हुआ।
उर्सुला की शिक्षा यूरोप के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। उन्होंने ब्रसेल्स के यूरोपियन स्कूल में पढ़ाई की, जो राजनयिकों और यूरोपीय नौकरशाहों के बच्चों के लिए एक बेहतरीन स्कूल है। बाद में उन्होंने गोटिंगेन विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उनके जीवन का एक अहम पहलू यह है कि लंदन में पढ़ाई के दौरान सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपना नाम बदलकर रोज लैडसन रख लिया था। इसकी वजह यह थी कि उस दौरान यूरोप के वामपंथी उग्रवादी अलग-अलग जगहों पर जर्मन नेताओं और उनके परिवारवालों को निशाना बना रहे थे।
उर्सुला वॉन डेर लेयन ने अपने करियर की शुरुआत एक डॉक्टर के रूप में की थी, लेकिन अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उन्होंने 40 के दशक की उम्र में राजनीति में कदम रखा। वह जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली कैबिनेट सदस्य रहीं, जिन्होंने 2005 से 2019 तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

