छठ पूजा : पूरे देश मना रहा छठ पूजा, प्रकृति के प्रति आस्था का पर्व
आज देशभर में छठ पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। छठ पूजा के तीसरे दिन संध्या अर्घ्य का होता है। आज के दिन व्रती घाट पर अपने परिवार के सदस्यों संग किसी पवित्र नदी के किनारे आकर शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देती हैं और छठी मईया की पूजा करती है। पंचांग के अनुसार आज सूर्यास्त का समय 05 बजकर 40 मिनट का है। इस दौरान सभी व्रती अस्त होते सूर्यदेव की पूजा और अर्घ्य देती हैं।

आज बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में लोक आस्था का महापर्व छठ मनाया जा रहा है। सूर्यउपासना का सबसे बड़ा दिन छठ का त्योहार होता है। भविष्य पुराण के अनुसार श्री कृष्ण ने सूर्य को संसार के प्रत्यक्ष देवता बताते हुए कहा है कि इनसे बढ़कर दूसरा कोई देवता नहीं है। सम्पूर्ण जगत इन्हीं से उत्पन्न हुआ है और अंत में इन्हीं में विलीन हो जाएगा। जिनके उदय होने से ही सारा संसार चेष्टावान होता है एवं जिनके हाथों से लोकपूजित ब्रह्मा और विष्णु तथा ललाट से शंकर उत्पन्न हुए हैं।

सूर्योपनिषद के अनुसार सूर्य की किरणों में समस्त देव, गंधर्व और ऋषिगण निवास करते हैं। सूर्य की उपासना के बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है,भले ही अमरत्व प्राप्त करने वाले देवता ही क्यों न हों।
छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य दोनों को ही अर्घ्य देने का खास महत्व होता है। छठ पर्व का तीसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य सबसे खास दिन होता है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठी माता को फल, फूल और ठेकुआ अर्पित किया जाता है। छठ पूजा में इन पांच फलों को जरूर शामिल करना चाहिए- केला, अनानास, नींबू, डाभ,गन्ना और सिंघाड़ा।

