DURG BREAKING: राज्य बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष श्रीमती शर्मा ने ली समीक्षा बैठक, बाल श्रम रोकथाम हेतु दिए दिशा-निर्देश

 

दुर्ग 21 मई 2025/ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में 18 मई को सर्किट हाउस दुर्ग में बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संवर्धन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में बाल श्रम, किशोर न्याय, बच्चों की नशे की आदतों तथा मूलभूत सुविधाओं जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श और आगामी कार्ययोजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि बाल श्रम समाज के लिए कलंक है और इसे जड़ से खत्म करने के लिए सभी विभागों को मिलकर अभियान चलाना होगा। उन्होंने ‘एकल खिड़की प्रणाली’ लागू करने के निर्देश दिए, जिसके तहत बाल श्रमिक पाए जाने पर उनके पुनर्वास, परिवार को रोजगार और आर्थिक सहायता जैसे कार्य त्वरित रूप से एक ही स्थान से संपादित हो सकें। उन्होंने कहा हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि तब होगी जब एक भी बाल श्रमिक ना मिलें।

 

बाल कल्याण के लिए ‘फ्रेंडली रेस्क्यू’ और पुनर्वास पर जोर

 

रेस्क्यू के दौरान बाल श्रमिक बच्चों से मित्रवत व्यवहार रखने और उनकी पारिवारिक स्थिति को समझते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया गया। साथ ही बाल श्रमिकों के पुनर्वास के साथ-साथ उनके परिवारों को स्थायी रूप से आजीविका योजनाओं से जोड़ने की बात कही गई। बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि सभी शासकीय संस्थाओं में पेयजल, बिजली, शौचालय और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। सामाजिक संगठनों के सहयोग से “हाइजीन पर हल्ला बोल” जैसे जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने को कहा।

 

नशा मुक्ति और किशोर न्याय पर गंभीर चर्चा

 

बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को गंभीरता से लेते हुए, नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना पर विचार किया गया। साथ ही दुर्ग जिले में किशोर न्याय अधिनियम 2015 (संशोधित 2021) के अंतर्गत लंबित 198 प्रकरणों की समीक्षा की गई। पुलगांव स्थित बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण भी किया गया, जहाँ बच्चों के साथ संवाद कर उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली गई और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया।

श्रीमती शर्मा ने विशेष रूप से कहा कि कानून के विरुद्ध कार्य करने वाले बच्चों को भी पहले एक सामान्य बालक की तरह देखा जाए। उन्होंने सभी विभागों से आग्रह किया कि वे अपने इमोशन्स को जोड़कर नवाचार करें और बच्चों के हित में निर्णय लें। “जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि” के सिद्धांत को व्यवहार में लाने की अपील की गई।

 

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