छत्तीसगढ़ में प्री-वेडिंग शूट पर बड़ा फैसला, साहू समाज ने लगाया बैन

डिजिटल डेस्क | दुर्ग/रायपुर: भारतीय समाज में विवाह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो जीवन की पवित्र शुरुआत का प्रतीक है। किंतु वर्तमान समय में इस पवित्र बंधन से पहले ही कैमरा, लाइट, लोकेशन और रील्स हावी होते नजर आ रहे हैं। पहाड़ों, झरनों, महंगे होटलों और ऐतिहासिक स्थलों पर होने वाले प्री-वेडिंग शूट अब यादों को संजोने के बजाय दिखावे और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनते जा रहे हैं। इससे यह प्रश्न खड़ा हो रहा है कि क्या यह महज़ एक फैशन ट्रेंड है या फिर धीरे-धीरे हमारी संस्कृति, संस्कार और सामाजिक संतुलन पर गहरा प्रभाव डाल रहा है।

जहां पहले विवाह सादगी, मर्यादा और पारिवारिक सहभागिता के साथ संपन्न होते थे, वहीं आज शादी से पहले ही वर-वधू खुद को सेलिब्रिटी कपल के रूप में प्रस्तुत करने लगे हैं। महंगे परिधान, लग्ज़री गाड़ियां, दूरस्थ लोकेशन और लंबे समय तक चलने वाले शूट भारतीय विवाह संस्कृति की मूल भावना से अलग नजर आते हैं, जहां सादगी को सर्वोच्च मूल्य माना गया है।

 

साहू समाज सहित कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह परंपरा नहीं, बल्कि फिल्मी और बाजारू संस्कृति की नकल है, जो समाज की जड़ों को कमजोर कर रही है।

इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में परंपरा, संस्कार और सादगी को प्राथमिकता देने वाले साहू समाज ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ की बैठक में प्री-वेडिंग शूट को समाज की परंपराओं के विपरीत मानते हुए इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया है। इस निर्णय को समाज में विवाह की मूल भावना को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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