Durg Breaking: जिस वारदात ने दुर्ग को हिला दिया था…आज आया फैसला! 6 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी सोमेश यादव को फांसी की सजा

06 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म एवं हत्या के गंभीर प्रकरण में दुर्ग पुलिस की त्वरित एवं वैज्ञानिक विवेचना, विशेष न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव को मृत्युदंड से किया दंडित

 

▪️ बालिका के लापता होने की सूचना मिलते ही मोहन नगर पुलिस ने तत्काल पतासाजी प्रारंभ कर उपलब्ध संसाधनों एवं पुलिस टीमों के माध्यम से बालिका की तलाश शुरू की।

▪️ तलाश के दौरान बालिका को वाहन से बरामद कर तत्काल चिकित्सकीय सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किया

▪️ पुलिस ने घटनास्थल एवं संबंधित स्थानों से भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, DNA तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा।

▪️ साक्ष्य आधारित विवेचना के परिणामस्वरूप विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने आरोपी को दोषसिद्ध कर दो प्रमुख धाराओं में मृत्युदंड तथा अन्य धारा में 05 वर्ष सश्रम कारावास दिया।

▪️ प्रकरण में त्वरित कार्यवाही और विवेचना के लिये पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा एक विशेष टीम गठित की गई थी जिसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर ,निरीक्षक (विवेचक)शिव चंद्रा, माननीय न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार का विशेष योगदान रहा है ।

थाना मोहन नगर के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित इस गंभीर प्रकरण में दुर्ग पुलिस ने सूचना प्राप्त होने से लेकर पतासाजी, साक्ष्य संरक्षण, आरोपी की गिरफ्तारी, वैज्ञानिक परीक्षण और न्यायालयीन प्रक्रिया तक प्रत्येक स्तर पर विधिसम्मत एवं साक्ष्य आधारित कार्रवाई सुनिश्चित की। पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और वैज्ञानिक विवेचना से प्रकरण को मजबूत साक्ष्यों के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

 

दिनांक 06.04.2025 को थाना मोहन नगर क्षेत्र में 06 वर्ष 03 माह की बालिका के लापता होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही पुलिस द्वारा समय गंवाए बिना बालिका की पतासाजी प्रारंभ की गई। पुलिस टीमों द्वारा संभावित स्थानों पर तलाश की गई तथा उपलब्ध तकनीकी एवं मैदानी सूचनाओं के आधार पर बालिका की खोज की गई।

 

पतासाजी के दौरान पुलिस टीम द्वारा बालिका को एक वाहन से बरामद किया गया। पुलिस द्वारा तत्काल मानवीय संवेदनशीलता के साथ उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा उसे मृत घोषित किया गया। इसके बाद पुलिस ने बिना विलंब मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम तथा अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की।

 

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए वहां उपलब्ध साक्ष्यों का सूक्ष्मता से संकलन किया गया। विवेचना में किसी एक प्रकार के साक्ष्य पर निर्भर रहने के बजाय मौखिक, दस्तावेजी, चिकित्सकीय, परिस्थितिजन्य, जैविक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को समग्र रूप से संकलित एवं परीक्षण कराया गया।

 

त्वरित कार्रवाई एवं वैज्ञानिक विवेचना

दुर्ग पुलिस की कार्रवाई का प्रमुख आधार यह रहा कि घटना के तत्काल बाद साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनके वैज्ञानिक परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। विवेचना के दौरान—

 

घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा एवं आवश्यक साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की गई।

 

आरोपी की पहचान कर उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया।

 

आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी एवं जप्ती की गई।

 

आरोपी के कपड़ों तथा घटनास्थल से प्राप्त सामग्रियों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया।

 

मृतिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून एवं अन्य संबंधित सामग्री विधिवत जप्त की गई।

 

आरोपी एवं संबंधित व्यक्तियों के DNA परीक्षण हेतु नमूने प्राप्त किए गए।

 

घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध CCTV फुटेज एवं DVR को सुरक्षित कर जप्त किया गया।

 

जप्त सामग्री को FSL एवं DNA परीक्षण के लिए विधिवत भेजा गया।

 

प्राप्त वैज्ञानिक रिपोर्टों को चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल किया गया।

 

 

इस प्रकार पुलिस द्वारा प्रकरण की विवेचना को केवल परिस्थितिजन्य तथ्यों तक सीमित न रखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्य एवं तकनीकी साक्ष्यों से पुष्ट किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों का विधिवत दस्तावेजीकरण कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

 

प्रकरण बालिका के विरुद्ध गंभीर लैंगिक अपराध एवं हत्या से संबंधित है। बालिका की पहचान एवं मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अपराध करने के तरीके से संबंधित अनावश्यक विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों एवं न्यायालयीन परीक्षण के आधार पर अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

विशेष दाण्डिक प्रकरण (पॉक्सो) क्रमांक 44/2025 में माननीय अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफ.टी.एस.सी., विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग द्वारा दिनांक 10.09.2026 को निर्णय पारित किया गया।

 

माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5(ड) एवं 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के अंतर्गत दोषसिद्ध किया गया।

 

न्यायालय द्वारा प्रकरण को “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 06(1) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के अंतर्गत मृत्युदंड तथा प्रत्येक धारा में ₹5,000 अर्थदंड अधिरोपित किया गया। इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के अंतर्गत 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड से दंडित किया गया।

 

न्यायालयीन आदेश के अनुसार उक्त दंड एक साथ भुगताए जाने हैं तथा अर्थदंड अदा नहीं किए जाने की स्थिति में निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मृत्युदंड की पुष्टि संबंधी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर के समक्ष विधि अनुसार होगी।

 

पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण

प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीड़ित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया तक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हुए प्रकरण को साक्ष्यपूर्ण एवं विधिसम्मत रूप से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना रहा। न्यायालय द्वारा मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के अंतर्गत ₹7,00,000 की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया गया है।

 

दुर्ग पुलिस की कार्रवाई से सामने आया संस्थागत दृष्टिकोण

इस प्रकरण में दुर्ग पुलिस की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि एक संवेदनशील बाल अपराध की सूचना प्राप्त होते ही त्वरित प्रतिक्रिया, बालिका की तलाश, तत्काल चिकित्सकीय सहायता, साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और प्रभावी विवेचना को प्राथमिकता दी गई।

 

पुलिस द्वारा घटनास्थल पर उपलब्ध छोटे से छोटे साक्ष्य को सुरक्षित रखने, जैविक साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराने, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को संरक्षित करने तथा चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आपस में जोड़कर प्रकरण की विवेचना को साक्ष्य आधारित बनाया गया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि गंभीर अपराध से संबंधित तथ्य केवल आरोप के स्तर पर न रहें, बल्कि न्यायालयीन परीक्षण के लिए आवश्यक साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत किए जा सकें।

 

यह कार्रवाई कानून के शासन, वैज्ञानिक पुलिसिंग, पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था के प्रति दुर्ग पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ित की गरिमा एवं पहचान की गोपनीयता बनाए रखना भी प्राथमिकता है।

 

प्रकरण की त्वरित कार्यवाही के लिये पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा एक विशेष टीम उठी की गई थी जिसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर ,थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा द्वारा पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL एवं DNA परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में थाना मोहन नगर के विवेचक सहित संबंधित पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

न्यायालय में इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार का विशेष योगवान रहा है ।।

 

दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी अथवा अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। विशेषकर बालिकाओं एवं बच्चों की सुरक्षा के मामलों में सूचना देने में देरी न करें। समय पर प्राप्त सूचना पुलिस को त्वरित कार्रवाई और साक्ष्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।

 

दुर्ग पुलिस महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष, संवेदनशील एवं वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही आम नागरिकों से अपेक्षा है कि वे बच्चों की सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए पुलिस का सहयोग करें।

 

बालिका की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसके नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।

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