जीवन निर्माण में संस्कारों का विशेष महत्व – मुनि विराटसागर

 

दुर्ग नवकार भवन में प्रारंभ सहजानंदी वर्षावास जनमेदनी की अभूतपूर्व उपस्थिति में पूर्ण हर्ष एवं उत्साह के साथ गति पर है।

इस वर्ष मूर्तिपूजक संघ दुर्ग को प.पू. उपाध्याय द्वय प.पू.श्री महेंद्र सागरजी मसा एवं प.पू.श्री मनीषसागर जी मसा के विद्वान शिष्य रत्न प.पू.विराटसागरजी मसा, प.पू.मैत्रीवर्धन सागरजी मसा, प.पू.आत्मवर्धनसागर सागरजी मसा के वर्षावास का सुखद सानिध्य प्राप्त हुआ है।गुरुदेव की निश्रा में दुर्ग संघ के सभी सदस्य सहजानंदी वर्षावास समिति के सदस्यों के मार्गदर्शन में पूर्ण उत्साह एवं उमंग के साथ भाग ले रहे है,सभी की समृद्ध उपस्थिति से सभागार खचाखच भर जाता है।

आज रविवारीय प्रवचनमाला के अंतर्गत जीवन संस्कार के विभिन्न पहलुओं पर गुरुदेव श्री का व्याख्यान हुआ।इसमें विशेष रूप से गर्भ संस्कार, गृह संस्कार, सहन संस्कार, भय संस्कार से विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से सभा को परिचित कराया।उन्होंने कहां हमारा जीवन 3 पन्नों की किताब है पहला पेज बचपन अर्थात भूमिका, दूसरा पेज जवानी, हमारा संपूर्ण जीवन अर्थात किताब का मूल पार्ट और तीसरा पेज बुढ़ापा अर्थात उपसंहार।हमको अपनी किताब सुंदर लिखनी है तो परमात्मा के वचनों के प्रति, उनके बताए मार्ग के प्रति श्रद्धा रखनी होगी।अगर हमारे तीनों पेज सही है तो परमात्मा के प्रति आभार प्रगट करना चाहिए।साप्ताहिक गृहकार्य के लिए उन्होंने अगले रविवार तक परिवार का संविधान बनाकर लाने का निर्देश दिया।

दूसरे सत्र में 11 बजे से 18 वर्ष से ऊपर के युवक एवं युवतियों का एक स्पेशल सेशन लिया।जिसमें उन्होंने कहां अपने अंदर का बैरियर तोड़ो, जिससे आप अपना विकास कर पाएंगे।अपना विश्लेषण किसी और से नहीं करना ऐसा केवल कमजोर व्यक्ति ही करता है, आदि चर्चाएं उन्होंने युवा पीढ़ी से की।इस सत्र में 200 से अधिक युवक युवतियों ने भाग लिया।

 

दोपहर 3.00 बजे से महिलाओं की नियमित स्वाध्याय की क्लास हुई, जिसमे उन्होंने गुरुमुख से शास्त्र का अध्ययन किया।दिन के अंतिम सत्र में 4.00 बजे से 12 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों के निखार के लिए जैन शासन के विभिन्न सोपानों से उन्हें परिचित कराया गया।

 

सुबह सत्र के पश्चात गौतम प्रसादी एवं संध्या बच्चों के लिए भी स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी।

वर्षावास समिति जैन समाज के सभी महिलाओं, पुरुषों, युवक , युवतियों एवं बच्चों से अधिक से अधिक संख्या में चातुर्मास के प्रत्येक कार्यक्रम में आने का निवेदन करती है। उल्लेखनीय है कि प्रतिदिन सुबह 9.00 से 10.00 बजे तक प्रवचन का क्रम नवकार भवन, ऋषभ नगर दुर्ग में रहता है।

तपस्याओ के क्रम में आत्मशोधन तप प्रारंभ है।जिसमें 60 तपस्वी तपस्या कर रहे है।बड़ी तपस्याएं भी प्रारंभ है।

 

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