गणेश चतुर्थी : श्रद्धा और उल्लास का पर्व, जानें क्यों मनाते हैं यह पर्व और कब है शुभ मुहूर्त
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी का पर्व इस बार 27 अगस्त, बुधवार को पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर में भी गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापना की तैयारियाँ जोरों पर हैं। पंडालों की सजावट, झांकी और सांस्कृतिक आयोजनों से माहौल भक्तिमय हो गया है।

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?
धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन माता पार्वती ने मिट्टी से भगवान गणेश की रचना की और उनमें प्राण फूंके थे। तभी से यह दिन गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता माना गया है। श्रद्धालु इस दिन गणपति की स्थापना कर दस दिनों तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और सामाजिक आयोजनों में भाग लेते हैं।

गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष चतुर्थी तिथि 26 अगस्त रात 11:45 बजे से आरंभ होकर 27 अगस्त रात 08:30 बजे तक रहेगी।
पंडितों के अनुसार गणेश प्रतिमा स्थापना का सबसे शुभ समय 27 अगस्त को प्रातः 11:15 से 01:45 बजे तक (मध्यान्ह काल) है। इस समय गणेश स्थापना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

नगर के प्रमुख मंदिरों और गणेश मंडलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जगह-जगह आकर्षक झांकियाँ सजाई गई हैं। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की गूंज से वातावरण गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंजायमान हो रहा है। कई समितियों ने इस अवसर पर भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भंडारे का आयोजन भी रखा है।
गणेश चतुर्थी से आरंभ होने वाला यह पर्व दस दिनों तक चलेगा और अनंत चतुर्दशी (5 सितम्बर) के दिन गणपति विसर्जन के साथ संपन्न होगा।

