दुर्ग की सियासत का सबसे बड़ा सवाल: 2028 में क्या गजेंद्र यादव को टक्कर दे पाएगी कांग्रेस, या विकास के आगे फिर पड़ जाएगी फीकी?

डिजिटल डेस्क |दुर्ग। छत्तीसगढ़ में 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में दुर्ग शहर विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनती नजर आ रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के गजेंद्र यादव ने दो बार लगातार विधायक रहे अरुण वोरा को बड़े वोट अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद से गजेंद्र यादव लगातार क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर सक्रिय रहे हैं। इंदिरा मार्केट में मल्टी लेवल पार्किंग, आईटी पार्क, युवाओं के लिए स्विमिंग पूल, बैडमिंटन क्लब और अन्य कई परियोजनाओं को भाजपा अपनी उपलब्धियों के तौर पर जनता के सामने रख रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर गजेंद्र यादव को उम्मीदवार बनाती है, तो क्या कांग्रेस उनके सामने मजबूत चुनौती पेश कर पाएगी?

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दुर्ग शहर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की स्थिति खुलकर सामने आ चुकी है। एक ओर पूर्व विधायक अरुण वोरा अपनी अलग राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल अपने समर्थकों के साथ संगठन में सक्रिय दिखाई देते हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस आंतरिक मतभेदों को दूर कर एकजुट होकर चुनाव लड़ती है तो मुकाबला रोचक हो सकता है। वहीं यदि गुटबाजी जारी रहती है और भाजपा विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सफल रहती है, तो गजेंद्र यादव की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 2028 के चुनाव में दुर्ग की जनता विकास के मुद्दे पर मतदान करती है या फिर किसी नए राजनीतिक विकल्प को मौका देती है। फिलहाल यह सवाल बना हुआ है कि क्या कांग्रेस गजेंद्र यादव के सामने मजबूत चुनौती खड़ी कर पाएगी या फिर एक बार फिर संगठनात्मक कमजोरियां उस पर भारी पड़ेंगी।

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