नेक पहल: 5 दिन में 200 से ज्यादा परिवारों ने 1500 से ज्यादा कपड़े दान कियें उसे ज़रूरतमंदो तक पहुँचा रहे जैन समाज के युवा

 

जैन समाज के युवाओं ने इस दिवाली पर जरूरतमंदों परिवारों और उनके बच्चों की मदद के लिए अनूठी पहल की। युवाओं ने समाज के लगभग 200 से ज्यादा परिवारों से उनके बिना उपयोग के रखी ड्रेस, शॉल, चादर समेत कई तरह के 1500 से ज्यादा कपड़े इकट्ठे किए। फिर उसे बस्तियों में जाकर वहां रह रहे जरूरतमंद परिवारों में बांटा। इसके लिए एक पूरा सप्ताह तय किया गया। 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक किया गया ।

यह पहल जैन समाज के युवाओं के ग्रुप जीव दया की गर्ल्स टीम ने शुरू की, जिसमें ग्रुप के लगभग 65 से ज्यादा सदस्यों ने सहयोग दिया।

 

बीते 4 नवंबर से युवाओं ने जैन समाज के लोगों को सोशल मीडिया के अलावा होर्डिंग्स के जरिये लोगो तक मेसेज दिया ।

 

5 दिन में 200 से ज्यादा परिवारों ने 1500 से ज्यादा कपड़े

रविवार को छातागढ़ में श्रमिक परिवारों और बस्ती

उरला बस्ती, पटरीपार, रेलवे स्टेशन, बघेरा, साईं मंदिर , बोरसी के जरूरतमंद बच्चों को कपड़े बांटते युवा।

 

माध्यम से वस्त्रदान के मुहिम की जानकारी दी। इसके बाद सैकड़ों परिवार मदद के लिए आगे आए। कई घरों से फोन आने पर युवा खुद कपड़े कलेक्ट करने पहुंचे, जिसे सदर बाजार के ओसवाल भवन में बनाए केंद्र में इकट्ठा किया। कपड़ों की बराबर पैकिंग कर अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए तैयार किया गया और फिर बांटने निकले।

 

पायल पारख ने बताया कि इस पहल की सराहना सिंधी समाज, अग्रवाल समाज के लोगों ने भी की है। आगे उन्होंने इस अभियान से जुड़ने की इच्छा भी जताई है।

 

समाज से सोशल मीडिया पर की अपील, मदद के लिए बढ़े हाथ

 

अर्चना बोहरा, पूनम बुरड, तेजल कटारिया , ,दीक्षा नाहर,ने बताया कि सामने दीपावली का त्योहार है। इस अवसर कई ऐसे जरूरतमंद होते हैं, जो अपने व बच्चों के लिए कपड़े नहीं खरीद पाते। उनका त्योहार मायूसी में न गुजरे, इसलिए टैग लाइन जीव दया का प्रयास, कपड़े पहुंचे जरूरतमंद के पास, थीम पर समाज के लोगों को जोड़ा गया। नतीजा यह निकला कि लगभग 200 से ज्यादा परिवारों ने पुराने के साथ नए कपड़े भी लाकर दिए, जिसका इस्तेमाल नहीं किया था। इसे पाकर जरूरतमंद परिवारों, खासकर बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं।

300 से ज्यादा जरूरतमंद को कपड़े बांट चुके, आज समापन

समाज की नम्रता बाफना, तिरुमला चंचल पारख, शिखा लुनावत ,तेजल कटारिया ने बताया कि वस्त्रदान के लिए यह मुहिम 4 से 9 अक्टूबर तक चलाई गई ।पहले दिन से ही कपड़े मिलने शुरू हो गए थे, जिसे तुरंत हैं। ही पैक कर दूसरे दिन बांटने निकलते इन पांच दिनों में रेलवे स्टेशन रोड, बस स्टैंड के पीछे डिपरापारा, हरिजन पारा, गवलीपारा समेत आसपास करीब 300 से ज्यादा गरीब, जरूरतमंद मिले, जिन्हें कपड़े बांटे। रविवार को छातागढ़ गौशाला में काम करने वाले श्रमिकों और गंजपारा बस्ती में रहने वाले 30 से 35 बच्चों को कपड़ों के साथ ही जते भी दिए।

 

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