12 फरवरी भारत बंद: श्रम कानून, ट्रेड डील और निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल, 600 जिलों में असर की आशंका
चार नए श्रम कानूनों समेत विभिन्न मांगों को लेकर आज भारत बंद, 600 से अधिक जिलों में असर की आशंका
डिजिटल डेस्क | दुर्ग/दिल्ली: देशभर की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आज 12 फरवरी को भारत बंद आयोजित किया गया है। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में घोषित इस देशव्यापी हड़ताल में विभिन्न क्षेत्रों के कामगारों और कर्मचारियों की व्यापक भागीदारी की संभावना जताई गई है। यूनियनों के अनुसार, बंद का असर देश के 600 से अधिक जिलों में देखने को मिल सकता है।
भारत बंद के प्रमुख मुद्दे
1. चार नए श्रम कानूनों का विरोध:
ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि नए लेबर कोड से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर हुई है। उनका कहना है कि इन कानूनों से नियोक्ताओं को कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति में अधिक छूट मिलती है, जिससे श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
2. भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध:
संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस समझौते से डेयरी उत्पाद, अनाज, सोयाबीन तेल और पशु चारा जैसे क्षेत्रों में सस्ते आयात बढ़ेंगे, जिससे भारतीय किसानों और कृषि बाजार को नुकसान पहुंचेगा।
3. निजीकरण के खिलाफ आंदोलन:
सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का भी विरोध किया जा रहा है। यूनियनों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को निजी हाथों में सौंपने से रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और न्यूनतम वेतन में वृद्धि:
कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग दोहराई है। साथ ही संविदा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने और वेतन वृद्धि की भी मांग की गई है।
5. अन्य प्रमुख मांगें:
बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई, ड्राफ्ट सीड बिल, SHANTI Act और VB-G RAM G Act 2025 का भी विरोध किया जा रहा है। श्रमिक संगठनों ने कृषि नीतियों में बदलाव और भूमि-बीज कानूनों में पारदर्शिता की मांग की है।
किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर
देशव्यापी हड़ताल के चलते बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, गैस और जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती हैं। हड़ताल में लगभग 30 करोड़ कामगारों के शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि सभी बैंक यूनियन इसमें शामिल नहीं हैं। बैंकिंग क्षेत्र की नौ में से तीन यूनियन—ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI)—हड़ताल में भाग ले रही हैं।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) समेत इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, एसईडब्ल्यूए, एक्टू, एलपीएफ और यूटीयूसी जैसे संगठन भी संयुक्त मंच का हिस्सा हैं।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने कहा है कि यह हड़ताल मजदूरों, कर्मचारियों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोजित की गई है और सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की गई है।

