दुर्ग ब्रेकिंग: वोरा दिल्ली रवाना: 14 दिसंबर की ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ महारैली में पार्टी शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में होंगे शामिल
दुर्ग।
दिल्ली के रामलीला मैदान में 14 दिसंबर को आयोजित होने जा रही कांग्रेस की ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ महारैली के लिए देशभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का बड़ा जत्था रवाना हो चुका है। इसी कड़ी में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा आज दिल्ली के लिए प्रस्थान हुए। उनके साथ पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू, पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन भी इस राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होने रवाना हुए.

महारैली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति तय मानी जा रही है। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेता भाग लेंगे। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों से भी बड़े नेताओं की मौजूदगी रहेगी तथा प्रदेशाध्यक्ष और प्रभारी नेता शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार शीर्ष नेतृत्व की यह संयुक्त उपस्थिति रैली को बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बनाएगी।
वोरा ने प्रस्थान से पूर्व कहा कि यह रैली सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार को बचाने के लिए जनजागरण का राष्ट्रीय संकल्प है।
उन्होंने कहा—
“इस रैली का उद्देश्य चुनाव व्यवस्था में हो रही कथित धांधलियों, मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव के खिलाफ देशभर में एक मजबूत संदेश देना है। भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर रहे हैं—यह बेहद गंभीर मुद्दा है और जनता का विश्वास इससे आहत हुआ है।”

कांग्रेस का आरोप है कि अनेक राज्यों में मतदाता सूची से विरोधी विचार वाले मतदाताओं के नाम हटाए गए, फर्जी वोटरों को जोड़ा गया और बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर “मतों की चोरी” की जा रही है।
वोरा ने कहा कि यह रैली तय करेगी कि देश संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से ही चलेगा, न कि किसी सत्ता-इशारे पर नियंत्रित संस्थाओं के भरोसे।
उन्होंने आगे कहा—
“चुनाव आयोग ने सत्ता के दबाव में आकर पूरे चुनावी प्रक्रिया की गरिमा को चोट पहुंचाई है। लोकतंत्र को बचाने का समय आ गया है। दिल्ली की यह रैली उन सभी नागरिकों की आवाज बनेगी जो संविधान, लोकतंत्र और वोट के अधिकार में विश्वास रखते हैं। भविष्य में ऐसी घटनाएँ न दोहराई जाएँ—इसके लिए संघर्ष करना आवश्यक है।”

