दुर्ग की सफाई व्यवस्था हुई बेनकाब……महापौर जी, ये कैसी सफाई व्यवस्था? तीन घंटे की बारिश में डूबा दुर्ग, निरीक्षण और विकास के दावे पानी में बहे
डिजिटल डेस्क |दुर्ग। शुक्रवार की रात करीब तीन घंटे हुई लगातार झमाझम बारिश ने दुर्ग शहर की सफाई और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं, नालियां जाम हो गईं और बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा प्रतिदिन वार्डों का निरीक्षण कर सफाई, नाली, सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं। लेकिन शुक्रवार की बारिश के बाद शहर की जो तस्वीर सामने आई, उसने इन निरीक्षणों और दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता का सवाल है कि यदि महापौर द्वारा लगातार वार्डों का निरीक्षण किया जा रहा है और सफाई व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जा रही है, तो बारिश के कुछ ही घंटों में नालियां जाम क्यों हो गईं? सड़कों पर पानी क्यों भर गया? जल निकासी की व्यवस्था पहले से दुरुस्त क्यों नहीं की गई?
महापौर के निरीक्षण क्या केवल फोटो खिंचवाने और दिखावे तक सीमित हैं?
दुर्ग शहर की जनता ने विकास और बेहतर मूलभूत सुविधाओं की उम्मीद में महापौर को जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन वर्तमान स्थिति में नालियों की सफाई, सड़कों की हालत, गड्ढे, बंद स्ट्रीट लाइट और जलभराव जैसी समस्याएं अब भी जनता के सामने खड़ी हैं। शुक्रवार की बारिश ने इन सभी व्यवस्थाओं की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया।
सबसे शर्मनाक स्थिति उन वार्डों की रही, जहां जनप्रतिनिधि और महापौर के करीबी पार्षद होने के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल नजर आई। शंकर नगर वार्ड के पार्षद शेखर चंद्राकर के वार्ड में भी बारिश के बाद जलभराव और सफाई व्यवस्था की स्थिति ने विकास कार्यों के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल को अभी लगभग डेढ़ वर्ष ही हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में ही यदि शहर की सफाई और जल निकासी व्यवस्था बारिश के सामने पूरी तरह विफल नजर आती है, तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता का विषय है।
जनता अब केवल निरीक्षण और आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहती है। महापौर और नगर निगम प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि नालियों की नियमित सफाई क्यों नहीं हुई, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कब किया जाएगा और बारिश से पहले तैयारियों के नाम पर आखिर क्या काम किया गया?
तीन घंटे की बारिश ने दुर्ग शहर के विकास की पूरी कहानी पानी में बहा दी है। अब समय आ गया है कि महापौर और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि फोटो खिंचवाने वाले निरीक्षणों से आगे बढ़कर वास्तविक काम करें और जनता को जवाब दें।

