दुर्ग कितना संवरा?…..हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे”… एक साल बाद दुर्ग कितना संवरा? महापौर के ‘अटल विश्वास पत्र’ पर जनता के सवालों की बौछार!…..पिंक टॉयलेट, नैपकिन मशीन से ऐप तक… वादे कितने पूरे?

डिजिटल डेस्क |दुर्ग। नगर निगम चुनाव से पहले विकास और बदलाव के बड़े-बड़े वादों के साथ भाजपा ने दुर्ग की जनता के सामने अपना विजन रखा। 2025 में भाजपा प्रत्याशी अलका बाघमार महापौर बनीं और इसके बाद नगर निगम का बजट 2025-26 पेश किया गया। इस बजट को “अटल विश्वास पत्र” नाम दिया गया—संदेश साफ था, “हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे।”

लेकिन अब सवाल यही है कि करीब एक साल बाद इस “विश्वास पत्र” में लिखे कितने वादे जमीन पर दिखाई दे रहे हैं?

अटल विश्वास पत्र में महिलाओं को संपत्ति कर में 25 प्रतिशत छूट, इंदिरा मार्केट में मल्टीलेवल पार्किंग, छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन मशीन, प्रमुख चौक-चौराहों और धार्मिक स्थलों के आसपास पिंक टॉयलेट, महिलाओं के लिए बर्तन बैंक, आयुर्वेदिक पार्क, “महापौर माई सिटी ऐप” और मेधावी विद्यार्थियों के लिए महापौर सम्मान निधि जैसी योजनाओं का उल्लेख किया गया था।

दस्तावेज में वादे चमकदार हैं, लेकिन शहर की तस्वीर सवाल खड़े कर रही है।

इंदिरा मार्केट बदहाल, पार्किंग की समस्या जस की तस?

इंदिरा मार्केट दुर्ग का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्राहक पहुंचते हैं। पार्किंग की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अटल विश्वास पत्र में इंदिरा मार्केट और जिला आयुर्वेदिक औषधालय क्षेत्र में मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण का वादा किया गया था।

हालांकि, इस परियोजना पर अब काम शुरू हो गया हैं इस योजना को बजट में प्रमुखता से शामिल किया गया था, देखना ये होगा कि कब तक तैयार होता हैं

शौचालय से लेकर महिलाओं की सुविधाओं तक सवाल

अटल विश्वास पत्र में महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट बनाने का वादा किया गया था। वहीं महिलाओं के लिए बर्तन बैंक की योजना के तहत महतारी वंदन योजना की 10 महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें 2 से 3 लाख रुपये तक की बर्तन सामग्री उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

लेकिन इन योजनाओं की जमीनी स्थिति को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। क्या ये योजनाएं वास्तव में शुरू हुईं? अगर हुईं तो कितनी महिलाओं को इसका लाभ मिला? नगर निगम को इसका सार्वजनिक आंकड़ा सामने रखना चाहिए।

छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन मशीन का क्या हुआ?

अटल विश्वास पत्र में दुर्ग नगरीय निकाय क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों की छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन मशीन लगाने की घोषणा की गई थी।

यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि छात्राओं की स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि अब तक कितने स्कूल-कॉलेजों में यह सुविधा पहुंची?

“महापौर माई सिटी ऐप” भी सवालों के घेरे में

जनता को नगर निगम और शासन की योजनाओं की जानकारी घर बैठे उपलब्ध कराने तथा निगम के करों का ऑनलाइन भुगतान आसान बनाने के लिए “महापौर माई सिटी ऐप” की घोषणा की गई थी।

लेकिन जनता के बीच सवाल है—ऐप कहां है? कितने लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं? कितनी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हुईं?

महापौर सम्मान निधि का भी इंतजार?

अटल विश्वास पत्र में यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप 1 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। इसे “महापौर सम्मान निधि योजना” का नाम दिया गया।

अब सवाल यह है कि इस योजना के तहत कितने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मान निधि दी गई? यदि योजना लागू हुई है तो लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

“विश्वास पत्र” अब जवाब मांग रहा है

राजनीति में वादे करना आसान है, लेकिन उन वादों को जमीन पर उतारना असली परीक्षा होती है। दुर्ग की जनता ने भाजपा को नगर निगम की सत्ता सौंपी, महापौर अलका बाघमार को जिम्मेदारी दी और विकास की उम्मीद की।

अब करीब एक साल बाद जनता यह जानना चाहती है कि “अटल विश्वास पत्र” में लिखे वादों में से कितने पूरे हुए, कितने अधूरे हैं और कितने सिर्फ कागजों में रह गए?

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