स्मार्ट मीटर’ नहीं, भाजपा का ‘शॉक मीटर’ : अरुण वोरा,  बोले— बिजली बिल के नाम पर सरकार कर रही खुली वसूली

दुर्ग। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने प्रदेशभर में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर बढ़ते जनआक्रोश के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर नहीं, यह भाजपा सरकार का ‘शॉक मीटर’ है, जिसने आम जनता को राहत नहीं बल्कि चौगुने बिजली बिल और आर्थिक शोषण का झटका दिया है। जिस योजना को पारदर्शिता और सुविधा का माध्यम बताकर लागू किया गया था, वही आज लाखों परिवारों के लिए चिंता, तनाव और आर्थिक संकट का कारण बन गई है।

 

अरुण वोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लगभग हर जिले से शिकायतें सामने आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर लगते ही बिजली के बिल दो, तीन और चार गुना तक बढ़ गए हैं। कहीं हजारों तो कहीं लाखों रुपये के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। राजधानी रायपुर में एक उपभोक्ता को 9 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल थमा दिया गया, जो इस पूरी योजना की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।कई जिलों में जनता का आक्रोश इस कदर बढ़ गया कि लोगों ने स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजली कार्यालयों के बाहर फेंक दिए। यह सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है।

 

उन्होंने कहा कि जिन परिवारों का पहले 300 से 500 रुपये प्रतिमाह बिजली बिल आता था, आज उन्हीं परिवारों को 2500 से 4000 रुपये तक के बिल थमाए जा रहे हैं। पहले से महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती जीवन-यापन लागत से जूझ रही जनता पर भाजपा सरकार ने स्मार्ट मीटर के नाम पर आर्थिक हमला बोल दिया है। यह योजना जनता की जेब काटने का नया माध्यम बन गई है।

 

वोरा ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि ऊर्जा विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है लेकिन मुख्यमंत्री जनता की आवाज सुनने के बजाय मौन धारण किए हुए हैं। सरकार न तो निष्पक्ष जांच कराने को तैयार है और न ही जनता को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम उठा रही है।

 

वोरा ने कहा कि प्रदेशभर में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, विभिन्न सामाजिक संगठन और स्वयं बिजली मीटर रीडर भी इस योजना के विरोध में सड़क पर उतर चुके हैं।अरुण वोरा ने मांग की कि स्मार्ट मीटर योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए, पुराने मीटर पुनः लगाए जाएं, सभी बढ़े हुए बिजली बिलों की न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तथा गलत बिलों से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान की जाए।

 

उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ देश को बिजली देने वाला राज्य है, लेकिन विडंबना यह है कि यहां की जनता को ही सबसे महंगी और सबसे परेशान करने वाली बिजली व्यवस्था झेलनी पड़ रही है। भाजपा सरकार जनता की जेब पर डाका डाल रही है और मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। अब जनता ‘शॉक मीटर’ और चौगुने बिजली बिलों का अन्याय सहने वाली नहीं है। स्मार्ट मीटर नहीं, छत्तीसगढ़ की जनता को स्मार्ट, संवेदनशील और जवाबदेह सरकार चाहिए।”

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