पंडवानी की अमर आवाज़ खामोश: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, कला जगत में शोक की लहर……
दुर्ग/रायपुर।छत्तीसगढ़ की लोककला एवं देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका पद्म विभूषण, पद्मभूषण एवं पद्मश्री सम्मानित तीजन बाई का आज तड़के लगभग 3:15 बजे निधन हो गया। उनके निधन से कला, साहित्य एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है।
तीजन बाई ने अपने अद्वितीय गायन और अभिनय के माध्यम से पंडवानी कला को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई। वे ‘वेदमती शैली’ की सबसे बड़ी कलाकार मानी जाती थीं। मंच पर तंबूरे के साथ अकेले ही महाभारत के विभिन्न पात्रों—भीम, अर्जुन, द्रौपदी सहित अन्य चरित्रों—को सशक्त अभिनय और गायन के जरिए जीवंत कर देती थीं।
अपने लंबे कलात्मक जीवन में तीजन बाई ने भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में एक हजार से अधिक मंचीय प्रस्तुतियां दीं और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1987 में पद्मश्री, 2003 में पद्मभूषण तथा 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा वर्ष 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया।
तीजन बाई का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गनियारी में किया जाएगा। उनके निधन को छत्तीसगढ़ की लोककला और भारतीय सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोक संतप्त परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

