दुर्ग में कल पानी सप्लाई प्रभावित, कई वार्डों में दोपहर की जलापूर्ति होगी लेट – निगम का अलर्ट

🔹विद्युत विभाग के मरम्मत कार्य के चलते कल कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति होंगे प्रभावित,

🔹बघेरा,बोरसी,पोटिया, पुलगांव टंकियों से संबंधित अनेक वार्डो में दोपहर की पानी सप्लाई में होगी देरी,

दुर्ग/12 मार्च/ नगर पालिक निगम दुर्ग सीमा क्षेत्र अंतर्गत बोरसी, पोटिया, पुलगांव, बघेरा, सिकोला बस्ती, कातुलबोर्ड तथा गंजपारा सहित आसपास के क्षेत्रों में 42 एमएलडी इंटेकवेल के माध्यम से फिल्टर प्लांट के जरिए पेयजल आपूर्ति की जाती है।

और 24 एमएलडी क्षेत्र में आने वाले पदमनाभपुर टंकी- वार्ड नं. 43 (कसारीडीह, पूर्व), वार्ड नं. 44 (बाबा गुरूघासीदास वार्ड), वार्ड नं. 45 (पद्मनाभपुर पश्चिम), वार्ड नं. 46 (पद्मनाभपुर पूर्व)

शंकर नगर टंकी – वार्ड नं. 10 (शंकर नगर, पश्चिम), वार्ड नं. 11 (शंकर नगर, पूर्व), वार्ड नं. 12 (मोहन नगर, पश्चिम), वार्ड नं. 13 (मोहन नगर, पूर्व),

शक्तिनगर टंकी – वार्ड नं. 17 (औद्योगिक नगर, उत्तर), वार्ड नं. 18 (औद्योगिक नगर, दक्षिण), वार्ड नं 19 (शहीद भगत सिंह दक्षिण), वार्ड नं. 20 (शहीद भगत सिंह उत्तर), वार्ड नं. 21 (तितुरडीह), वार्ड नं. 22 (स्टेशन पारा)

गिरधारी नगर टंकी वार्ड नं. 09 (स्वामी विवेकानंद वार्ड), वार्ड नं. 05 (मरारपारा),

हनुमान नगर टंकी – वार्ड नं 19 (शहीद भगत सिंह दक्षिण), वार्ड नं. 20 (शहीद भगत सिंह उत्तर), वार्ड नं. 21 (तितुरडीह),

ट्रांसपोर्ट नगर टंकी – वार्ड नं. 16 (करहीडीह)

शनिचारी बाजार टंकी- वार्ड नं. 30 (तमेरपारा), वार्ड नं. 31 (आपापुरा), वार्ड नं. 32, वार्ड नं. 33 (चंडीमंदिर), वार्ड नं. 34 (शिव पारा), वार्ड नं. 35 (रामदेव मंदिर), वार्ड नं. 36 (गंजपारा), वार्ड नं. 37 (आजाद वार्ड), वार्ड नं. 38 (आंशिक)

प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत विभाग द्वारा 24 एवं 42 एमएलडी शिवनाथ नदी इंटेकवेल में तकनीकी सुधार एवं आवश्यक मरम्मत कार्य किए जाने के कारण दिनांक 13 मार्च (शुक्रवार) को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक विद्युत सप्लाई बंद रहेगी।

विद्युत विभाग द्वारा आपूर्ति बंद रहने के कारण इंटेकवेल से संचालित पंपों का संचालन प्रभावित रहेगा, जिसके चलते संबंधित क्षेत्रों में द्वितीय पहर की जलापूर्ति में विलंब होने की संभावना है।

नगर निगम द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि उक्त अवधि को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार पहले से ही पानी का संग्रह कर लें, ताकि असुविधा से बचा जा सके। तकनीकी कार्य पूर्ण होते ही जलापूर्ति को सामान्य रूप से पुनः प्रारंभ कर दिया जाएगा।

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